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Ranchi Court News: JSSC-CGL और CDPO नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

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रांची: झारखंड सरकार की ओर से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली चार अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने सुनवाई के दौरान JSSC-CGL और CDPO परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी.

अदालत ने मामले में राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 7 सितंबर तक का समय दिया है. वहीं प्रार्थियों को सरकार के जवाब पर 14 सितंबर तक प्रति उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी.

सरकार को शपथ पत्र दाखिल करने के लिए टाइम फ्रेम

सुनवाई के दौरान अदालत ने महाअधिवक्ता रोहित राय से आग्रह किया कि इस तरह के सभी मामलों में सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल करने के लिए एक निश्चित टाइम फ्रेम तय किया जाए. इसके बाद कोर्ट ने सरकार को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा.

CDPO और JSSC-CGL परीक्षा को लेकर चुनौती

प्रार्थियों ने राज्य सरकार की ओर से CDPO (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) परीक्षा का विज्ञापन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी है. इसके अलावा JSSC-CGL परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी आदेश के खिलाफ भी याचिका दायर की गई है.

वहीं, कुछ प्रार्थियों ने JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश को भी चुनौती दी है. इस मामले में हाईकोर्ट ने CDPO और JSSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा रद्द करने के संबंध में राज्य सरकार और JPSC से जवाब मांगा है.

CID जांच के बाद सरकार ने लिया था फैसला

दरअसल, CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिनमें कथित तौर पर TDPL की भूमिका सामने आई थी. इसके साथ ही वर्ष 2014 से आयोजित सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की भी घोषणा की गई थी.

इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से परीक्षा रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और जांच के दायरे में परीक्षाओं को शामिल करने से संबंधित अधिसूचना जारी की गई. अधिसूचना के अनुसार 22 परीक्षाओं को रद्द, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है.

अब झारखंड हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद JSSC-CGL और CDPO से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लग गई है. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी.

पलामू में NHAI निर्माण साइट पर फायरिंग, दो मजदूर घायल

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पलामू: जिले के सतबरवा थाना क्षेत्र के रजडेरवा में नेशनल हाईवे निर्माण साइट पर गुरुवार देर रात बाइक सवार अपराधियों ने फायरिंग कर दी. घटना में दो मजदूर गोली लगने से घायल हो गए। दोनों घायल मजदूर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के रहने वाले हैं. घटना के बाद इलाके में पुलिस ने सर्च अभियान तेज कर दिया है.

घायल मजदूरों की पहचान अजय हांसदा और संजय हांसदा के रूप में हुई है. अजय के पैर में गोली लगी है, जबकि संजय के पेट में गोली लगी है. दोनों को इलाज के लिए मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है.

घटनास्थल से चार खोखा और पर्चा बरामद

फायरिंग की सूचना मिलते ही पलामू एसपी कपिल चौधरी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया. पुलिस ने मौके से चार खोखा बरामद किया है. साथ ही कथित तौर पर राहुल दुबे गिरोह से जुड़ा एक पर्चा भी बरामद हुआ है.

पुलिस के अनुसार, देर रात करीब दो बजे के बाद बाइक पर सवार दो अपराधी निर्माण स्थल पर पहुंचे और मजदूरों के अस्थाई कैंप को निशाना बनाते हुए फायरिंग की. वारदात के बाद दोनों अपराधी मौके से फरार हो गए.

फ्लाईओवर के ऊपर बनाया गया है अस्थाई कैंप

सतबरवा इलाके में नेशनल हाईवे-139 के फोरलेन का निर्माण कार्य चल रहा है. रजडेरवा में हाईवे का फ्लाईओवर बनाया गया है, जिसके ऊपर मजदूरों के रहने के लिए अस्थाई कैंप बनाया गया है. इसी कैंप में देर रात अपराधियों ने फायरिंग की घटना को अंजाम दिया.

पलामू एसपी कपिल चौधरी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है. अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों द्वारा सर्च अभियान चलाया जा रहा है. पुलिस घटना के पीछे के कारणों और गिरोह की भूमिका की भी जांच कर रही है.

झारखंड हाईकोर्ट की बड़ी राहत: JPSC 11वीं-13वीं सिविल सेवा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक

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रांची। झारखंड सरकार द्वारा नियुक्त कर्मियों को हटाने और विभिन्न नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश को चुनौती देने वाली तीन अलग-अलग याचिकाओं पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति रद्द करने के सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी.

अदालत ने मामले में राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जवाब मांगा है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता पीएएस पति ने पक्ष रखा.

तीन याचिकाओं पर हुई सुनवाई

मामले में दो अलग-अलग याचिकाओं में दीपमाला एवं अन्य तथा सोनम कुमारी ने सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसमें 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, विज्ञापन संख्या 1/2024 को रद्द करने का आदेश दिया गया था.

वहीं, तीसरी याचिका में सौरव सिंह एवं अन्य ने JPSC द्वारा आयोजित फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा, विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी है.

नौकरी छोड़कर ज्वाइन करने का दिया हवाला

याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने दूसरी जगह की नौकरी छोड़कर इस पद पर योगदान दिया था. उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया. इसी बीच राज्य सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर नियुक्ति रद्द करने का आदेश जारी कर दिया.

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से नियुक्ति रद्द करने संबंधी सरकार के आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया है.

CID जांच के बाद सरकार ने लिया था फैसला

गौरतलब है कि CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिनमें TDPL शामिल रहा था. इसके साथ ही वर्ष 2014 से हुई सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं को लेकर जांच कराने की भी घोषणा की गई थी.

इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से परीक्षा रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और जांच से संबंधित अधिसूचना जारी की गई. अधिसूचना में 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख किया गया है.

फिलहाल हाईकोर्ट के अगले आदेश तक JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक रहेगी. मामले में राज्य सरकार और JPSC के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी.

पलामू में पिता की हत्या के आरोपी पुत्र गिरफ्तार, कोर्ट भेजा गया

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पलामू। पांकी थाना क्षेत्र के मतुली गांव में पिता की हत्या के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी अभियुक्त पुत्र संतोष सिंह उर्फ संतु सिंह (32) को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए भेज दिया.

पुलिस के अनुसार, पांकी थाना कांड संख्या 133/2026, दिनांक 16 अगस्त 2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1)/238 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. मामले में ग्राम मतुली, रागनियाटांड़ निवासी संतोष सिंह उर्फ संतु सिंह, पिता स्व. जगतपाल सिंह, को प्राथमिकी अभियुक्त बनाया गया था.

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे माननीय न्यायालय में उपस्थापन के लिए भेजा गया.पुलिस के मुताबिक, मामले में आगे की जांच और अन्य आवश्यक कार्रवाई जारी है.

बाढ़ में बह गईं किताबें, उपायुक्त ने फिर थामा कृतिका की पढ़ाई का हाथ

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पलामू: जन समाधान कार्यक्रम में अपनी समस्या लेकर पहुंची कक्षा 5 की छात्रा कृतिका कुमारी की पढ़ाई अब नहीं रुकेगी.
हाल में भारी बारिश और कोयल नदी का जलस्तर बढ़ने से कृतिका के घर में पानी घुस गया था, जिससे उसकी कॉपी-किताबें एवं पढ़ाई की अन्य सामग्री बह गई थी. कृतिका ने उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत से पढ़ाई के लिए किताबें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था.
बच्ची की बात को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने तत्काल जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. आज उपायुक्त ने अपने कार्यालय कक्ष में कृतिका को स्वयं किताबें उपलब्ध कराईं.
कृतिका का सपना जवाहर नवोदय विद्यालय में दाखिला लेकर आगे पढ़ाई करने का है. किताबें मिलने के बाद उसके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी.

फोरलेन पर भीषण हादसा, युवक की मौत; दूसरा गंभीर

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गढ़वा। रमना-रांची-वाराणसी फोरलेन इकोनॉमिक कॉरिडोर पर सीरियाटोंगर के समीप देर रात भीषण सड़क हादसा हो गया. दुर्घटना में श्रीबंशीधर नगर थाना क्षेत्र के कोल्हुवा गांव निवासी 30 वर्षीय श्रीकेश भोक्ता की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं, 21 वर्षीय सनी कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया.

घटना की सूचना मिलते ही रमना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल सनी कुमार को अस्पताल पहुंचाने में मदद की. सदर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने हायर सेंटर रेफर कर दिया.

पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को जब्त कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है. देर रात हुए इस हादसे से क्षेत्र में शोक का माहौल है.

बाढ़ में बह गई किताबें, डीसी से लगाई गुहार, शिक्षा विभाग ने शुरू की मदद

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पलामू: कोयल नदी में आई बाढ़ ने कई परिवारों को मुश्किल में डाल दिया. इसी बाढ़ की चपेट में मेदिनीनगर के सुदना बैंक कॉलोनी की पांचवीं कक्षा की छात्रा कृतिका की किताबें और कॉपियां भी बह गईं. पढ़ाई का सामान बर्बाद होने के बाद उसके सामने पढ़ाई जारी रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई. लेकिन कृतिका ने हिम्मत नहीं हारी और बुधवार को जन समाधान कार्यक्रम में पलामू डीसी दिलीप प्रताप सिंह के सामने अपनी समस्या रखी.

पड़ोस की आंटी के साथ पहुंची डीसी के पास

बुधवार की सुबह जन समाधान कार्यक्रम में जिलेभर से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे. इसी दौरान कृतिका भी अपने पड़ोस की आंटी का हाथ थामे डीसी के पास पहुंची. झिझकते हुए उसने अपनी बात रखी और बताया कि कोयल नदी के बाढ़ के पानी में उसकी किताबें और कॉपियां बह गई हैं. इसके कारण वह पढ़ाई नहीं कर पा रही है.

कृतिका ने बताया कि उसके पिता कोई काम नहीं करते, जबकि उसकी मां घर-घर जाकर घरेलू काम करके परिवार का खर्च चलाती हैं. वह फिलहाल एक निजी स्कूल में पढ़ती है. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बाढ़ में बर्बाद हुई किताब-कॉपियों को दोबारा खरीदना परिवार के लिए आसान नहीं है.

डीसी ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा

कृतिका की समस्या सुनने के बाद डीसी दिलीप प्रताप सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने जिला शिक्षा अधीक्षक को तत्काल आवश्यक पहल करने का निर्देश दिया. डीसी ने बच्ची को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह ठीक से पढ़ाई करे और उसे हर संभव मदद दी जाएगी.

डीसी के आश्वासन के बाद कृतिका के चेहरे पर उम्मीद नजर आई. उसके लिए किताबें और कॉपियां केवल पढ़ाई का सामान नहीं, बल्कि अपने भविष्य के सपनों को पूरा करने का जरिया हैं.

शिक्षा विभाग ने शुरू की कार्रवाई

कृतिका की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने भी तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है. जिला शिक्षा अधीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि छात्रा को जल्द किताबें और कॉपियां उपलब्ध कराई जा रही हैं. विभाग उसकी पढ़ाई में भी आवश्यक सहयोग करेगा.

विभाग की ओर से कृतिका के परिजनों से सरकारी स्कूल में नामांकन को लेकर भी बातचीत की गई है. हालांकि फिलहाल वह निजी स्कूल में पढ़ रही है, लेकिन शिक्षा विभाग ने उसकी पढ़ाई जारी रखने में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है.

बाढ़ किताबें बहा ले गई, सपने नहीं

कृतिका की कहानी इस बात की मिसाल है कि मुश्किल हालात के बावजूद हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. बाढ़ का पानी उसकी किताबें और कॉपियां बहा ले गया, लेकिन पढ़ने और आगे बढ़ने का उसका सपना नहीं बहा. अपनी छोटी सी उम्र में उसने हिम्मत जुटाकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी और अब शिक्षा विभाग की मदद से उसके दोबारा पढ़ाई शुरू करने की उम्मीद जगी है.

कृतिका की आंखों में अब वही सपना है-किताबें फिर हाथ में हों, पढ़ाई दोबारा शुरू हो और वह अपने परिवार को एक दिन गर्व महसूस करा सके.
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