अदालत ने मामले में राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जवाब मांगा है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता पीएएस पति ने पक्ष रखा.
तीन याचिकाओं पर हुई सुनवाई
मामले में दो अलग-अलग याचिकाओं में दीपमाला एवं अन्य तथा सोनम कुमारी ने सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसमें 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, विज्ञापन संख्या 1/2024 को रद्द करने का आदेश दिया गया था.
वहीं, तीसरी याचिका में सौरव सिंह एवं अन्य ने JPSC द्वारा आयोजित फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा, विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी है.
नौकरी छोड़कर ज्वाइन करने का दिया हवाला
याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने दूसरी जगह की नौकरी छोड़कर इस पद पर योगदान दिया था. उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया. इसी बीच राज्य सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर नियुक्ति रद्द करने का आदेश जारी कर दिया.
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से नियुक्ति रद्द करने संबंधी सरकार के आदेश को निरस्त करने का आग्रह किया है.
CID जांच के बाद सरकार ने लिया था फैसला
गौरतलब है कि CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, जिनमें TDPL शामिल रहा था. इसके साथ ही वर्ष 2014 से हुई सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं को लेकर जांच कराने की भी घोषणा की गई थी.
इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से परीक्षा रद्द करने, परीक्षा प्रक्रिया स्थगित करने और जांच से संबंधित अधिसूचना जारी की गई. अधिसूचना में 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख किया गया है.
फिलहाल हाईकोर्ट के अगले आदेश तक JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर नियुक्ति रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक रहेगी. मामले में राज्य सरकार और JPSC के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी.


