पलामू: झारखंड के पलामू के छतरपुर के डाली गांव में पर्यावरण संरक्षण और स्थायी अर्थव्यवस्था की अवधारणा को समर्पित पुस्तक “पारिस्थितिकी, स्थायी आर्थिकी है” का लोकार्पण ताला स्थित आकाश बाग में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ. यह कृति अमेरिका के विद्वान प्रोफेसर जॉर्ज अल्फ्रेड जेम्स द्वारा रचित है, जो सुंदरलाल बहुगुणा के जीवन, सत्याग्रह और पर्यावरण दर्शन से प्रेरित है.
हिन्दी अनुवाद डॉ. अर्चना बहुगुणा ने किया है. लोकार्पण समारोह में प्रो. जेम्स, चिपको आंदोलन के कर्नाटक के संचालक पांडुरंग हेगड़े तथा पर्यावरणविद डॉ. कौशल किशोर जसवाल की उपस्थिति रहे.
हिन्दी अनुवाद डॉ. अर्चना बहुगुणा ने किया है. लोकार्पण समारोह में प्रो. जेम्स, चिपको आंदोलन के कर्नाटक के संचालक पांडुरंग हेगड़े तथा पर्यावरणविद डॉ. कौशल किशोर जसवाल की उपस्थिति रहे.
अपने संबोधन में प्रो. जेम्स ने बताया कि बहुगुणा जी के विचारों से वे इतने प्रभावित हुए कि एक दशक तक भारत आकर उनसे संवाद करते रहे. उन्होंने कहा कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. पांडुरंग हेगड़े ने उनके वक्तव्य का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया.
कार्यक्रम में साहित्यकारों ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई. अनुपमा तिवारी, राकेश कुमार, अनुज कुमार पाठक, रमेश कुमार सिंह और रीना प्रेम दुबे ने अतिथियों को “चलें छंद की ओर” पुस्तक भेंट की. इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, साहित्यप्रेमी और पर्यावरण कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प दोहराया.
कार्यक्रम में साहित्यकारों ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई. अनुपमा तिवारी, राकेश कुमार, अनुज कुमार पाठक, रमेश कुमार सिंह और रीना प्रेम दुबे ने अतिथियों को “चलें छंद की ओर” पुस्तक भेंट की. इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, साहित्यप्रेमी और पर्यावरण कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प दोहराया.



