पलामू : जिला प्रशासन की ओर से शुक्रवार को कैटेगरी-2 के चार बालू घाटों की ऑनलाइन नीलामी सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई। JharkhandTenders पोर्टल के माध्यम से आयोजित इस नीलामी प्रक्रिया में कुल 13 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। चारों बालू घाटों की नीलामी से राज्य सरकार को कुल ₹26,58,73,000 राजस्व प्राप्त होगा। नीलामी में सबसे अधिक बोली विश्रामपुर प्रखंड के लालगढ़ बालू घाट के लिए ₹11.56 करोड़ की लगी।
बरवैया बालू घाट के लिए न्यूनतम बोली से पांच गुना अधिक राशि
पांकी प्रखंड स्थित बरवैया बालू घाट की नीलामी इस प्रक्रिया का प्रमुख आकर्षण रही। इस घाट के लिए न्यूनतम बोली ₹1,29,72,623 निर्धारित की गई थी, जबकि श्री कमलेश प्रसाद ने ₹5,25,45,300 की उच्चतम बोली लगाकर इसे प्राप्त किया। यह निर्धारित न्यूनतम बोली की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है। इस घाट की नीलामी के दौरान करीब 50 राउंड तक बोली लगाई गई, जिसे राज्य स्तर पर एक उल्लेखनीय उपलब्धि बताया जा रहा है।
किस बालू घाट के लिए कितनी लगी बोली?
नीलामी में सफल निविदादाताओं और उनके द्वारा लगाई गई उच्चतम बोलियों का विवरण इस प्रकार है-
- लालगढ़ बालू घाट, विश्रामपुर प्रखंड: श्री प्रमोद प्रसाद ने ₹11,56,28,600 की उच्चतम बोली लगाकर घाट प्राप्त किया।
- मिसिर पतरा बालू घाट, लेस्लीगंज प्रखंड: श्री अमित कुमार सिन्हा ने ₹6,16,40,500 की बोली लगाई।
- बरवैया बालू घाट, पांकी प्रखंड: श्री कमलेश प्रसाद ने ₹5,25,45,300 की उच्चतम बोली लगाई।
- कबरा कला बालू घाट, हैदरनगर प्रखंड: श्री शशिकांत गुप्ता उर्फ गुड्डू गुप्ता ने ₹3,60,58,600 की बोली लगाकर घाट प्राप्त किया।
इन चारों बालू घाटों की नीलामी से कुल ₹26,58,73,000 की राजस्व प्राप्ति होगी।
अब तक पांच बालू घाटों की नीलामी पूरी
जिला प्रशासन द्वारा इससे पहले कांके खुर्द बालू घाट की नीलामी भी सफलतापूर्वक संपन्न कराई जा चुकी है। इसके साथ ही पलामू जिले में कैटेगरी-2 के कुल पांच बालू घाटों की नीलामी पूरी हो गई है।
बालू की उपलब्धता बढ़ाने और अवैध खनन पर अंकुश की उम्मीद
जिला खनन पदाधिकारी श्री सुनील कुमार ने नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने वाले सभी व्यवसायियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन बालू घाटों के सुचारू एवं नियमानुसार संचालन के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि बालू घाटों की नीलामी से जिले में बालू की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे निर्माण कार्यों के लिए अन्य राज्यों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही बालू के अवैध खनन एवं परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
जिला खनन पदाधिकारी ने सभी सफल निविदा दाताओं से निर्धारित नियमों एवं पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए बालू घाटों का संचालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी निविदादाता जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करें, ताकि बालू खनन एवं परिवहन की प्रक्रिया व्यवस्था, पारदर्शिता और नियमानुसार संचालित हो सके।





