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झारखंड विधानसभा चुनाव: 10 हॉट सीटें, जिन पर है सबकी नजर

Jharkhand elections: 10 hot seats, which are under everyone's watch

23 December 2019

/ by Uday Bharat

रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव में 10 ऐसी सीटें हैं, जहां के रिजल्ट पर हर किसी की नजर है. सीएम रघुबर दास को जमशेदपुर पूर्वी सीट पर उन्हीं की सरकार में मंत्री रहे सरयू राय ने बगावत करते हुए चुनौती दी.
 इसके साथ ही बरहेट सीट पर जेएमएम नेता और पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के लिए भी प्रतिष्ठा की जंग है.
आइए जानते हैं, 

इन 10 हॉट सीटों का क्या है हाल:

1. जमशेदपुर पूर्वी- रघुबर दास (बीजेपी), सरयू राय (निर्दलीय), गौरव बल्लभ (कांग्रेस)

जमशेदपुर पूर्वी सीट पर सीएम रघुबर दास चुनाव लड़ रहे हैं. उन्हें यहां अपनी सरकार में मंत्री रहे सरयू राय से चुनौती मिल रही है. बीजेपी ने सरयू राय का टिकट काटा तो उन्होंने बगावत करते हुए रघुबर के खिलाफ मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया. वहीं चर्चित कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ भी यहां से रघुबर को चुनौती दे रहे हैं। गौरव वल्लभ वही शख्स हैं, जिन्होंने बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा से एक टीवी डिबेट के दौरान पूछा था कि 5 ट्रिल्यन में कितने जीरो होते हैं.पढ़े: युवती गई जंगल में, फिर मिला युवती का शव, रेप की आशंका

2. बरहेट- हेमंत सोरेन (जेएमएम), सिमोन मालतो (बीजेपी)

बरहेट सीट पर पूर्व सीएम और जेएमएम नेता हेमंत सोरेन किस्मत आजमा रहे हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में दुमका में हार के बावजूद जेएमएम के पास यह गढ़ बरकरार रहा था. सोरेन को जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन की तरफ से सीएम फेस के रूप में देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने यहां बीजेपी कैंडिडेट सिमोन मालतो के लिए रैली की थी. ऐसे में यहां का मुकाबला दिलचस्प है.


3. दुमका- हेमंत सोरेन (जेएमएम), लुइस मरांडी (बीजेपी)

जेएमएम के सोरेन परिवार का गढ़ मानी जाने वाली संथाल क्षेत्र की इस सीट पर हेमंत सोरेन मैदान में हैं. उनका मुकाबला रघुबर सरकार में मंत्री लुइस मरांडी से है. पिछली बार वह इस सीट से हार गए थे। लोकसभा चुनाव में जेएमएम चीफ शिबू सोरेन भी दुमका से हार गए थे.

4. धनवार- बाबूलाल मरांडी (जेवीएम), लक्ष्मण प्रसाद सिंह (बीजेपी), राजकुमार यादव (सीपीआई एमएल)

धनवार सीट पर आदिवासी नेता और झारखंड विकास पार्टी (जेवीएम) के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी मैदान में हैं. उनका मुकाबला बीजेपी के लक्ष्मण प्रसाद सिंह से है. पिछला चुनाव भी मरांडी यहां से हार गए थे. ऐसे में उनकी जीत-हार पर पार्टी का भविष्य टिका है.


5. रांची- सीपी सिंह (बीजेपी), महुआ मांझी (जेएमएम), वर्षा गाड़ी (एजेएसयू)

रांची सीट से रघुबर दास सरकार में मंत्री सीपी सिंह लगातार जीतते रहे हैं. रांची में इस बार कम वोटिंग हुई थी. जेएमएम की महुआ मांझी उन्हें कड़ी चुनौती दे रही हैं.

6. सिल्ली- सुदेश महतो (एजेएसयू), सीमा महतो (जेएमएम)

सिल्ली सीट इस चुनाव की हॉट सीटों में से है. ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष सुदेश महतो यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. एजेएसयू ने बीजेपी से गठबंधन तोड़कर अकेले चुनाव लड़ा है. पिछले चुनाव और उपचुनाव में वह यहां से हार गए थे. हालांकि पहले वह इस सीट से लगातार जीतते रहे हैं. ऐसे में उनके राजनीतिक करियर के लिए नतीजा अहम है.

7. मांडू- जय प्रकाश भाई पटेल (बीजेपी), राम प्रकाश भाई पटेल (जेएमएम), चंद्रनाथ भाई पटेल (जेवीएम)

मांडू सीट पर तीन भाइयों की टक्कर पर हर किसी की नजर टिकी है. चुनाव के ऐलान के बाद जयप्रकाश भाई पटेल ने जेएमएम छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया. वहीं, बड़े भाई रामप्रकाश भाई पटेल ने जेएमएम जॉइन कर ली. चचेरे भाई चंद्रनाथ भाई पटेल को जेवीएम ने प्रत्याशी बनाया है.

8. डालटनगंज- आलोक चौरसिया (बीजेपी), केएन त्रिपाठी (कांग्रेस)

पहले चरण के मतदान के दौरान इस सीट पर काफी बवाल हुआ था. बीजेपी कैंडिडेट आलोक चौरसिया के समर्थकों से झड़प के दौरान कांग्रेस कैंडिडेट केएन त्रिपाठी ने यहां एक पोलिंग बूथ पर पिस्तौल लहराई थी, जिस पर चुनाव आयोग ने रिपोर्ट तलब की है.

9. झरिया- रागिनी सिंह (बीजेपी), पूर्णिमा सिंह (कांग्रेस)

यह सीट सूरजदेव सिंह की पारिवारिक जंग की वजह से चर्चित है. जहां एक ओर सूरजदेव सिंह की बहू रागिनी सिंह को बीजेपी ने उतारा है, वहीं उनके खिलाफ सूरजदेव सिंह के भाई राजनारायण सिंह की बहू पूर्णिमा सिंह कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं. पिछले चुनाव में रागिनी के पति संजीव और पूर्णिमा के पति नीरज आमने-सामने थे, जिसमें संजीव को जीत मिली थी. कुछ महीने बाद नीरज की हत्या से पारिवारिक विवाद चरम पर पहुंच गया.

10. चक्रधरपुर- लक्ष्मण गिलुवा (बीजेपी), सुखराम उरांव (जेएमएम), शशिभूषण सामद (जेवीएम)

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा की यह सीट चुनावों में काफी चर्चित रही. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने यहां रैली में कई बार राम मंदिर का जिक्र किया था. जेएमएम ने यहां शशिभूषण सामद का टिकट काटकर सुखराम उरांव को टिकट दिया तो समद बागी हो गए.
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