पलामू : हजारीबाग के बरसोत बरही कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय परिसर में बतौर मुख्य अतिथि विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पर्यावरण धर्म व वनराखी मूवमेंट के प्रणेता पर्यावरणविद कौशल किशोर जायसवाल ने कार्यक्रम की शुरुआत पौधरोपण कर किया. पौधरोपण राष्ट्रीय गान एवं पर्यावरण धर्म की प्रार्थना के साथ किया गया. कार्यक्रम में शामिल लोगों को पौधरोपण के बाद पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की शपथ दिलाई गई.
श्री कौशल ने कार्यक्रम में शामिल लोगों को बताया कि वे इस अभियान को पिछले 52 वर्षों से अपनी निजी खर्चों पर न केवल झारखंड में चला रखा है बल्कि नेपाल भूटान समेत देश के 20 राज्यों के 77 जिलों के अलग- अलग हिस्सों में अबतक 37 लाख निःशुल्क पौधे वितरण शह रोपण कर चुके हैं . उनके द्वारा लगाए गए पौधे 10 वर्षों के बाद वृक्ष होने पर जब कटने लगे तभी वे वृक्षों को काटने से बचाने के लिए पर्यावरण धर्म चलाया. उसके आठ मूल मंत्रों के साथ वृक्षों पर रक्षाबंधन कर इस अभियान को आगे बढ़ाया. इससे उनके द्वारा लगाए गए पौधे के साथ साथ सरकार द्वारा कटाई किए जाने वाले वनों की नीलामी भी बंद कराने में सफलता मिली. यह मुहिम आज से 42 वर्ष पहले चलाई गयी थी. वनराखी मूवमेंट के तहत अब तक करीब पांच लाख वन वृक्षों पर राखियां बांध कर पेड़ों की रक्षा की जा चुकी हैं. वनराखी मूवमेंट में शामिल होकर जिन महिला- पुरुषों ने पेड़ों की सुरक्षा प्रदान करने में अपनी अहम भागीदारी निभा रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए अंगवस्त्र देकर समय- समय पर सम्मानित भी किया जाता रहा है. वर्ष 2019 में दस राज्यों के स्थान पर अब देश के 20 राज्यों में विभिन्न स्थानों पर रक्षाबंधन और पर्यावरण धर्म पर गोष्ठी के आयोजन कर दो लाख निःशुल्क पौधा वितरण और रोपण का लक्ष्य निर्धारित कर कार्यक्रम की शुरुआत पलामू जिले के ग्राम पंचायत डाली बाजार के कौशल नगर से की गई थी. उसी कड़ी में हजारीबाग के बरही कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में पौधरोपण कर लोगों के बीच निःशुल्क पौधे भी वितरित किये गए.
पर्यावरणविद कौशल ने अपने संबोधन में कहा कि पूरे विश्व में प्रदूषण की आग लगी है जिसे पानी से नहीं शुद्ध हवा से ही बुझाया जा सकता है. शुद्ध हवा बनाने का कोई उद्योग नहीं है. इसे केवल पेड़ पौधे से ही प्राप्त किया जा सकता है. इसलिए सभी लोगों को पर्यावरण धर्म को आत्मसात कर अधिक से अधिक पौधे लगाकर उसे बचाने की जरूरत है. तभी धरती के 84 लाख योनि जीवो के बचाया जा सकेगा.
उन्होंने कहा कि आजादी की दूसरी लड़ाई प्रदूषण के खिलाफ लड़ना होगा. पूरे विश्व के लोगों को एकजुट होकर पौधा रूपी मिसाइल से प्रदूषण नामक शत्रु को समाप्त करना होगा. नहीं तो धरती के तापमान जिस कदर बढ़ रही है वैसी हालात में 84 लाख योनि जीवों पर जल संकट के साथ-साथ ऑक्सीजन संकट भी होना तय है. इस भयावह स्थिति से बचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्र अपनाते हुए पौधा लगाना और बचाना होगा.
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वार्डेन श्रीमती सिंपल समेत कई वक्ताओं ने अपने संबोधन में पर्यावरणविद कौशल किशोर जायसवाल की ओर काफी लंबे अरसे से निःस्वार्थ और निःशुल्क किये जा रहे समाज सेवा को सराहनीय कदम बताया. संचालन श्रीमती ज्योति वर्मा ने की. जबकि धन्यवाद ज्ञापन नेहा कुमारी ने किया. कार्यक्रम में पुष्पा टोप्पो, आर्गन टोप्पो, दीपक कुमार, पिंटू, विनोद, सबवा देवी, रीना, अशोक, यीशु सिंह, अविनाश, गौतम, अनिल समेत स्कूल के सैकड़ो -छात्राएं और अभिभावक लोग शामिल थे.




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