पलामू: कोयल नदी में आई बाढ़ ने कई परिवारों को मुश्किल में डाल दिया. इसी बाढ़ की चपेट में मेदिनीनगर के सुदना बैंक कॉलोनी की पांचवीं कक्षा की छात्रा कृतिका की किताबें और कॉपियां भी बह गईं. पढ़ाई का सामान बर्बाद होने के बाद उसके सामने पढ़ाई जारी रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई. लेकिन कृतिका ने हिम्मत नहीं हारी और बुधवार को जन समाधान कार्यक्रम में पलामू डीसी दिलीप प्रताप सिंह के सामने अपनी समस्या रखी.
पड़ोस की आंटी के साथ पहुंची डीसी के पास
बुधवार की सुबह जन समाधान कार्यक्रम में जिलेभर से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे. इसी दौरान कृतिका भी अपने पड़ोस की आंटी का हाथ थामे डीसी के पास पहुंची. झिझकते हुए उसने अपनी बात रखी और बताया कि कोयल नदी के बाढ़ के पानी में उसकी किताबें और कॉपियां बह गई हैं. इसके कारण वह पढ़ाई नहीं कर पा रही है.
कृतिका ने बताया कि उसके पिता कोई काम नहीं करते, जबकि उसकी मां घर-घर जाकर घरेलू काम करके परिवार का खर्च चलाती हैं. वह फिलहाल एक निजी स्कूल में पढ़ती है. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बाढ़ में बर्बाद हुई किताब-कॉपियों को दोबारा खरीदना परिवार के लिए आसान नहीं है.
डीसी ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
कृतिका की समस्या सुनने के बाद डीसी दिलीप प्रताप सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया. उन्होंने जिला शिक्षा अधीक्षक को तत्काल आवश्यक पहल करने का निर्देश दिया. डीसी ने बच्ची को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह ठीक से पढ़ाई करे और उसे हर संभव मदद दी जाएगी.
डीसी के आश्वासन के बाद कृतिका के चेहरे पर उम्मीद नजर आई. उसके लिए किताबें और कॉपियां केवल पढ़ाई का सामान नहीं, बल्कि अपने भविष्य के सपनों को पूरा करने का जरिया हैं.
शिक्षा विभाग ने शुरू की कार्रवाई
कृतिका की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने भी तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है. जिला शिक्षा अधीक्षक संदीप कुमार ने बताया कि छात्रा को जल्द किताबें और कॉपियां उपलब्ध कराई जा रही हैं. विभाग उसकी पढ़ाई में भी आवश्यक सहयोग करेगा.
विभाग की ओर से कृतिका के परिजनों से सरकारी स्कूल में नामांकन को लेकर भी बातचीत की गई है. हालांकि फिलहाल वह निजी स्कूल में पढ़ रही है, लेकिन शिक्षा विभाग ने उसकी पढ़ाई जारी रखने में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है.
बाढ़ किताबें बहा ले गई, सपने नहीं
कृतिका की कहानी इस बात की मिसाल है कि मुश्किल हालात के बावजूद हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. बाढ़ का पानी उसकी किताबें और कॉपियां बहा ले गया, लेकिन पढ़ने और आगे बढ़ने का उसका सपना नहीं बहा. अपनी छोटी सी उम्र में उसने हिम्मत जुटाकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी और अब शिक्षा विभाग की मदद से उसके दोबारा पढ़ाई शुरू करने की उम्मीद जगी है.
कृतिका की आंखों में अब वही सपना है-किताबें फिर हाथ में हों, पढ़ाई दोबारा शुरू हो और वह अपने परिवार को एक दिन गर्व महसूस करा सके.

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