राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के परिसर में मानवीय संवेदना तार-तार होती नजर आई. यहां ऑर्थोपेडिक विभाग के कॉरिडोर में भूख से बेहाल महिला को जब कुछ भी खाने को नहीं मिला तो उसने जिंदा कबूतर को चबा लिया. इससे पहले वो कॉरिडोर में गुजर रहे लोगों से खाना मांगती रही, लेकिन किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया. महिला को मानसिक रुप से विक्षिप्त बताया जा रहा है.
रिम्स निदेशक की सफाई
इस बारे में रिम्स के निदेशक डॉ. डीके सिंह ने कहा कि सामाजिक संस्थाएं लावारिस लोगों को यहां लाकर छोड़ देती हैं. अस्पताल मानवीय संवेदना रखते हुए भी ऐसे मरीजों के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सकता. वैसे तो शहर में लोग रोज बचा हुआ खाना कूड़े में फेंक देते हैं, लेकिन जब वही खाना किसी को नसीब न हो तो कुछ ऐसी ही तस्वीर देखने को मिल सकती है.
रिम्स निदेशक का कहना है कि मरीज रिम्स में लावारिश मरीज है, लेकिन इसे रिम्स में भर्ती नहीं किया गया है क्योंकि उसकी बीमारी का यहां इलाज नहीं होता. निदेशक का कहना है कि ये विक्षिप्त मरीज है और इसके इलाज की रिम्स में कोई व्यवस्था नहीं है. लिहाजा, शायद इसी वजह से महिला को यहां एडमिट नहीं किया गया है. रिम्स निदेशक ने बताया कि इस तरह के मरीज से अस्पताल में सिर्फ अव्यवस्था ही फैलती है.

