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पत्थलगड़ी केस: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब- क्या राजद्रोह का केस वापस लेना चाहते है सोरेन सरकार

Pathalgadi case: Supreme Court asks for the answer- Does Soren government want to withdraw treason case

26 January 2020

/ by Uday Bharat

रांची: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की नवनिर्वाचित सोरेन सरकार से जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकार वह उन चार आदिवासी कार्यकर्ताओं के विरुद्ध राज्य में पत्थलगड़ी आंदोलन के समर्थन में कथित तौर पर फेसबुक पोस्ट लिखने के लिए राजद्रोह के आरोप में दर्ज मामले वापस लेना चाहती है? शीर्ष अदालत को आरोपियों की ओर से सूचित किया गया कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार के कैबिनेट के पहले निर्णयों में यह घोषणा भी शामिल थी, कि वह आंदोलन से जुड़े सभी आपराधिक मामले वापस लेगी.
पत्थलगड़ी समर्थक संसाधनों पर चाहते हैं अपना अधिकारपत्थलगड़ी नाम आदिवासियों के उस आदिवासी आंदोलन को दिया गया है जो ग्राम सभाओं को स्वायत्तता की मांग को लेकर किया गया. पत्थलगड़ी की मांग करने वाले चाहते हैं कि क्षेत्र में आदिवासियों पर देश का कोई कानून लागू नहीं हो. पत्थलगड़ी समर्थक जंगल और नदियों पर सरकार के अधिकारों को खारिज करते हैं. आंदोलन के तहत पत्थलगड़ी समर्थक गांव या क्षेत्र के बाहर एक पत्थर गाड़ते हैं या बोर्ड लगाते हैं जिसमें घोषणा की जाती है कि गांव एक स्वायत्त क्षेत्र हैं और इसमें बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश निषिद्ध है.

कोर्ट ने पूछा क्या सरकार केस को आगे बढ़ाना चाहती है?

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की एक पीठ ने झारखंड के स्थायी अधिवक्ता तापेश कुमार सिंह से कहा कि वह निर्देश प्राप्त करें और उसे मामले वापस लेने के बारे में किसी निर्णय के बारे में दो सप्ताह में सूचित करें. पीठ ने हाल में अपलोड किये गए अपने आदेश में कहा,

सरकार ने पत्थलगड़ी समर्थकों से किए थे ये वादेशुरुआत में जे विकास कोरा के नेतृत्व वाले चार याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता जोएल ने अदालत को सूचित किया कि राज्य में नयी सरकार ने शपथ ली है और उसने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में घोषणा की थी कि पत्थलगड़ी आंदोलन के चलते उत्पन्न आपराधिक मामले वापस लिये जाएंगे. राज्य के अधिवक्ता तापेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि ऐसा है तो याचिकाकर्ताओं को झारखंड हाईकोर्ट के गत वर्ष के उस फैसले के खिलाफ दायर अपनी अपील वापस ले लेनी चाहिए, जिसमें अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज मामले रद्द करने से इनकार कर दिया था. पीठ ने हालांकि तावेश कुमार सिंह से कहा कि वह सक्षम प्राधिकार से निर्देश प्राप्त करें और उसे दो सप्ताह में सूचित करें.
इसे भी पढ़े: युवा सहयोग समिति: पार्षद मिलन समारोह, मैं विकास करके दिखाऊंगी 20 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था मामलाझारखंड उच्च न्यायालय ने गत वर्ष 22 जुलाई को चार आरोपियों जे विकास कोरा, धर्म किशोर कुल्लू, इमिल वाल्टर कांडुलना और घनश्याम बिरुली के खिलाफ राजद्रोह के आरोप रद्द करने से इनकार कर दिया था. इन सभी के खिलाफ इस आरोप में मामले दर्ज किये गए थे कि इन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये पुलिस अधिकारियों पर हमले करने के लिए उकसाया. कुल 20 व्यक्तियों के खिलाफ मामले दर्ज किये गए थे जिनमें से मात्र चार अपने खिलाफ राजद्रोह और अन्य आरोप रद्द करने के अनुरोध के साथ शीर्ष अदालत पहुंचे.
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