गढ़वा : भवनाथपुर कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय परिसर में सोमवार को बतौर मुख्य अतिथि विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पर्यावरण धर्म व वनराखी मूवमेंट के प्रणेता पर्यावरणविद कौशल किशोर जायसवाल ने पौधरोपण कर कार्यक्रम की शुरुआत की.
राष्ट्रीय गान एवं पर्यावरण धर्म की प्रार्थना के साथ पौधरोपण कर कौशल ने पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की शपथ दिलाई. उन्होंने इस कार्यक्रम के अलावे अपने पर्यावरण धर्म के अनुकूल जीवन के सभी शुभ कार्यों की शुरुआत पौधरोपण से करने का संकल्प को भी मूर्त रूप दिया. उन्होंने केतार कार्तिक जायसवाल के गृह प्रवेश के मौके पर माँ चतुर्भुजी के मन्दिर परिसर में भी पौधरोपण किया. उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग के लोगों को अपने जीवन के शुभ घड़ी की शुरुआत पर्यावरण धर्म की रक्षा के लिए पौधरोपण से करना चाहिए.
श्री कौशल ने कार्यक्रम में शामिल लोगों को बताया कि वे इस अभियान को पिछले 52 वर्षों से अपनी निजी खर्चों पर न केवल झारखंड में चला रखा है बल्कि नेपाल भूटान समेत देश के 20 राज्यों के 77 जिलों के अलग- अलग हिस्सों में अबतक 37 लाख निःशुल्क पौधे लोगों के बीच बांटने और लगाने का काम किया है. उनके द्वारा लगाए गए पौधे 10 वर्षों के बाद वृक्ष होने पर जब कटने लगे तभी वे वृक्षों को काटने से बचाने के लिए पर्यावरण धर्म चलाया. उसके आठ मूल मंत्रों के साथ वृक्षों पर रक्षाबंधन कर इस अभियान को आगे बढ़ाया. इससे उनके द्वारा लगाए गए पौधे के साथ सरकार द्वारा कटाई किए जाने वाले वनों की नीलामी भी बंद कराने में सफलता मिली. यह मुहिम आज से 42 वर्ष पहले चलाई गयी थी. वनराखी मूवमेंट के तहत अब तक करीब पांच लाख वन वृक्षों पर राखियां बांध कर पेड़ों की रक्षा की जा चुकी हैं. वनराखी मूवमेंट में शामिल होकर जिन महिला- पुरुषों ने पेड़ों की सुरक्षा प्रदान करने में अपनी अहम भागीदारी निभा रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए अंगवस्त्र देकर समय- समय पर सम्मानित भी किया जाता रहा है. वर्ष 2019 में 15 राज्यों के विभिन्न स्थानों पर रक्षाबंधन और पर्यावरण धर्म पर गोष्ठी आयोजन कर दो लाख निःशुल्क पौधा वितरण और रोपण का लक्ष्य निर्धारित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी.
उसी कड़ी में सोमवार को कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में पौधरोपण कर लोगों के बीच निःशुल्क पौधे भी वितरित किये गए.
पर्यावरणविद कौशल ने अपने संबोधन में कहा कि पूरे विश्व में प्रदूषण की आग लगी है वह आग पानी से नहीं शुद्ध हवा से बुझेगी. शुद्ध हवा बनाने का कोई उद्योग नहीं है उसे पेड़ पौधे लगाकर ही प्राप्त किया जा सकता हैं. यानी प्रकृति उद्योग है. इसलिए सभी लोगों को पर्यावरण धर्म को आत्मसात कर अधिक से अधिक पौधे लगाकर उसे बचाने की जरूरत है. तभी धरती के 84 लाख योनि जीवों को बचाया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि आजादी की दूसरी लड़ाई प्रदूषण के खिलाफ लड़ना होगा. पूरे विश्व के लोगों को एकजुट होकर पौधा रूपी मिसाइल से प्रदूषण नामक शत्रु को समाप्त करना होगा । नहीं तो धरती के तापमान जिस कदर बढ़ रही है वैसी हालात में 84 लाख योनि जीवों पर जल संकट के साथ-साथ ऑक्सीजन संकट भी होना तय है. इस भयावह स्थिति से बचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्र अपनाते हुए पौधा लगाना और बचाना होगा.
कार्यक्रम की अध्यक्षता वार्डेन प्रियंका कुमारी व संचालन अमिता पांडेय ने की. जबकि धन्यवाद ज्ञापन सविता कुमारी ने किया. कार्यक्रम में मुख्य रूप से पूनम कुमारी, विनय कुमार गुप्ता समेत मंदिर के पुजारी बालमुकुंद पांडेय, कार्तिक जायसवाल, मिथिलेश वैद्य, ओम प्रकाश जायसवाल, राजेंद्र साहू, महेंद्र बैगा समेत कई प्रमुख लोग शामिल थे.
राष्ट्रीय गान एवं पर्यावरण धर्म की प्रार्थना के साथ पौधरोपण कर कौशल ने पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की शपथ दिलाई. उन्होंने इस कार्यक्रम के अलावे अपने पर्यावरण धर्म के अनुकूल जीवन के सभी शुभ कार्यों की शुरुआत पौधरोपण से करने का संकल्प को भी मूर्त रूप दिया. उन्होंने केतार कार्तिक जायसवाल के गृह प्रवेश के मौके पर माँ चतुर्भुजी के मन्दिर परिसर में भी पौधरोपण किया. उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग के लोगों को अपने जीवन के शुभ घड़ी की शुरुआत पर्यावरण धर्म की रक्षा के लिए पौधरोपण से करना चाहिए.
श्री कौशल ने कार्यक्रम में शामिल लोगों को बताया कि वे इस अभियान को पिछले 52 वर्षों से अपनी निजी खर्चों पर न केवल झारखंड में चला रखा है बल्कि नेपाल भूटान समेत देश के 20 राज्यों के 77 जिलों के अलग- अलग हिस्सों में अबतक 37 लाख निःशुल्क पौधे लोगों के बीच बांटने और लगाने का काम किया है. उनके द्वारा लगाए गए पौधे 10 वर्षों के बाद वृक्ष होने पर जब कटने लगे तभी वे वृक्षों को काटने से बचाने के लिए पर्यावरण धर्म चलाया. उसके आठ मूल मंत्रों के साथ वृक्षों पर रक्षाबंधन कर इस अभियान को आगे बढ़ाया. इससे उनके द्वारा लगाए गए पौधे के साथ सरकार द्वारा कटाई किए जाने वाले वनों की नीलामी भी बंद कराने में सफलता मिली. यह मुहिम आज से 42 वर्ष पहले चलाई गयी थी. वनराखी मूवमेंट के तहत अब तक करीब पांच लाख वन वृक्षों पर राखियां बांध कर पेड़ों की रक्षा की जा चुकी हैं. वनराखी मूवमेंट में शामिल होकर जिन महिला- पुरुषों ने पेड़ों की सुरक्षा प्रदान करने में अपनी अहम भागीदारी निभा रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए अंगवस्त्र देकर समय- समय पर सम्मानित भी किया जाता रहा है. वर्ष 2019 में 15 राज्यों के विभिन्न स्थानों पर रक्षाबंधन और पर्यावरण धर्म पर गोष्ठी आयोजन कर दो लाख निःशुल्क पौधा वितरण और रोपण का लक्ष्य निर्धारित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी.
पर्यावरणविद कौशल ने अपने संबोधन में कहा कि पूरे विश्व में प्रदूषण की आग लगी है वह आग पानी से नहीं शुद्ध हवा से बुझेगी. शुद्ध हवा बनाने का कोई उद्योग नहीं है उसे पेड़ पौधे लगाकर ही प्राप्त किया जा सकता हैं. यानी प्रकृति उद्योग है. इसलिए सभी लोगों को पर्यावरण धर्म को आत्मसात कर अधिक से अधिक पौधे लगाकर उसे बचाने की जरूरत है. तभी धरती के 84 लाख योनि जीवों को बचाया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि आजादी की दूसरी लड़ाई प्रदूषण के खिलाफ लड़ना होगा. पूरे विश्व के लोगों को एकजुट होकर पौधा रूपी मिसाइल से प्रदूषण नामक शत्रु को समाप्त करना होगा । नहीं तो धरती के तापमान जिस कदर बढ़ रही है वैसी हालात में 84 लाख योनि जीवों पर जल संकट के साथ-साथ ऑक्सीजन संकट भी होना तय है. इस भयावह स्थिति से बचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्र अपनाते हुए पौधा लगाना और बचाना होगा.
कार्यक्रम की अध्यक्षता वार्डेन प्रियंका कुमारी व संचालन अमिता पांडेय ने की. जबकि धन्यवाद ज्ञापन सविता कुमारी ने किया. कार्यक्रम में मुख्य रूप से पूनम कुमारी, विनय कुमार गुप्ता समेत मंदिर के पुजारी बालमुकुंद पांडेय, कार्तिक जायसवाल, मिथिलेश वैद्य, ओम प्रकाश जायसवाल, राजेंद्र साहू, महेंद्र बैगा समेत कई प्रमुख लोग शामिल थे.


