छतरपुर : सब कहते हैं सरकारी अस्पतालों में इलाज कराना मुश्किल है. लेकिन मध्य प्रदेश के छतरपुर में जिला अस्पताल की अलग ही कहानी है. यहां एक अजब वाकया हुआ. यहां दिमागी रूप से बीमार एक बुजुर्ग ने कई लोगों का इलाज कर दिया. उसने न सिर्फ उन सभी का चेकअप किया बल्कि उन्हें बाकायदा डॉक्टर की तरह दवाई की पर्ची भी लिख दी. लोग भी बिना किसी शक के उससे इलाज कराते रहे. ये शख्स फर्राटे से अंग्रेजी बोल रहा था और खुद को एम्स (AIIMS) का डॉक्टर बता रहा था.
दरअसल, अस्पताल में डॉक्टर का चेंबर खाली पड़ा था. डॉक्टर अपनी कुर्सी पर नहीं थे. यह देख कर बुजुर्ग मानसिक रोगी डॉक्टर के चेंबर में घुस आया. अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था का क्या हाल है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बुज़ुर्ग मानसिक रोगी आराम से अस्पताल में दाखिल हुआ और बेरोक-टोक के डॉक्टर के चेंबर में घुसकर उनकी खाली कुर्सी पर बैठ गया.
मानसिक रोगी ने किया इलाज
डॉक्टर के चेंबर में एक बुजुर्ग व्यक्ति को बैठा देख अस्पताल में आए मरीज उसे डॉक्टर समझने की भूल कर बैठे और उसके पास इलाज के लिए आ गए. फर्जी डॉक्टर बने बुजुर्ग ने भी किसी को निराश नहीं किया. बारी-बारी उसने सभी मरीजों का चेकअप किया और उन्हें डॉक्टर की तरह पर्चे पर दवा लिखकर दे दी. जब स्टाफ को इस बारे में पता लगा तो हड़कंप मच गया. फौरन उसे चेंबर से बाहर निकाला गया और फौरन सबको अलर्ट किया गया.
खाली सीट देख बैठा मरीज़
सरकारी अस्पताल में 20 नंबर का ये चेंबर डॉ. हिमांशु बाथम का है. जिस समय का ये वाक्या है वो अपनी सीट पर नहीं थे. उनकी जगह बैठे इस शख्स ने एक के बाद एक मरीजों को धड़ाधड़ पर्चे लिख दिए. डॉक्टर से दिखाने के बाद जब अस्पताल के मेडिकल स्टोर में अचानक एक साथ इतने मरीज दवा की पर्ची लेकर पहुंचे तो स्टाफ को शक हुआ. स्टाफ ने जब चेंबर में आकर देखा तो वहां डॉक्टर की जगह अजनबी को देखकर हैरान रह गया. उसने फौरन अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को सूचना दी. तब जाकर आनन-फानन में मानसिक रूप से बीमार बुजुर्ग को बाहर किया गया.

