UB DESK : प्रदेश की शिक्षा-व्यवस्था में सुधार लाने के लिए झारखंड की न ई हेमंत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाय़ा है. सरकार ने शिक्षा विभाग में नई स्थानांतरण नीति को अपनाने का फैसला किया है.
नई स्थानांतरण नीति में सभी महिला-पुरुष शिक्षकों को शहरी, ग्रामीण से लेकर नक्सली क्षेत्रों तक में अपनी सेवा देनी है. इसमें हर शिक्षक को अपनी सेवा का पांच साल इन क्षेत्रों में काम करना है. इसकी शुरुआत भी इस साल से होगी. अगर कोई शिक्षक-शिक्षिका लंबे समय से शहरों में कार्यरत हैं तो उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापित किया जाएगा.
सोशल ऑडिट की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग इसकी तैयारी शुरु कर दी है.
बताया जा रहा है कि सूबे के सरकारी स्कूलों में कराए गए सोशल ऑडिट में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षिकाएं शहरी क्षेत्रों की तुलना में कम हैं. बड़े स्कूलों में भी महिला शिक्षिकाओं का अभाव दिखा जबकि स्कूलों में आधे पुरुष और आधी महिला शिक्षिकाएं होनी चाहिए.
वहीं, बड़े स्कूल जहां छात्र के अनुपात में छात्राएं ज्यादा हैं, वहां पुरुष से ज्यादा महिला शिक्षिकाएं होनी चाहिए. सोशल ऑडिट की पूरी रिपोर्ट आने के बाद स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग इसे शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के समक्ष रखेगा. इसके बाद स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

