UB DESK : झारखंड के चर्चित बकोरिया मुठभेड़ कांड मामले का शिकायतकर्ता दरोगा मो. रुस्तम सीबीआई गवाह बनने को तैयार हो गया है. मो.रुस्तम के सीबीआई गवाह बनने पर पूर्व डीजीपी डीके पांडेय, पलामू के तत्कालीन एसपी कन्हैया मयूर पटेल समेत अन्य अधिकारियों की मुसीबतें बढ़ सकती है.
बता दें कि आठ जून 2015 को हुई इस कथित मुठभेड़ में डॉ अनुराग समेत 12 लोगों की मौत हुई थी. मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिजन इस मुठभेड़ को फर्जी बताते रहे हैं. इसके लिए उन्होंने हाईकोर्ट में भी अपील की थी. बाद में इसकी सीबीआई जांच शुरू हुई.
सीबीआई ने अपनी प्रारंभिक जांच में माना है कि यह मुठभेड़ फर्जी थी. 3 जुलाई 2019 को सीबीआई ने इस मामले में सतबरवा ओपी के तत्कालीन प्रभारी मो रुस्तम, मनिका थानेदार गुलाम रब्बानी और सदर थाना पलामू के तत्कालीन प्रभारी हरीश पाठक का बयान लिया था. मुठभेड़ को सच बता एफआईआर दर्ज कराने वाले मो रुस्तम ने तब अपने बयान में बताया था कि उन्होंने तत्कालीन एसपी कन्हैया मयूर पटेल के कहने पर एफआईआर करायी थी.
इधर बकोरिया मुठभेड़ कांड में बड़े उलटफेर की बात सामने आ रही है. इस कांड के शिकायतकर्ता दरोगा मो रुस्तम ने सीबीआई का गवाह बनने पर सहमति दे दी है. मो रूस्तम के सरकारी गवाह बनने से पुलिस, सीआरपीएफ व कोबरा बटालियन के आला अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ेंगी.
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रुस्तम के सरकारी गवाह बनने के बाद सीबीआई अब इस कांड में जेजेएमपी की भूमिका जांचेगी.
पिछले वर्ष जुलाई में भी बकोरिया मुठभेड़ कांड की जांच में जुटी सीबीआई ने घटनास्थल पर तहकीकात की थी. इसके लिए घटनास्थल पर मुठभेड़ का सीन दोहराया गया था. उस समय घटनास्थल के आसपास के तीन थानों के थानेदारों से पूछताछ की गई. कथित तौर पर नक्सलियों से जब्त स्कॉर्पियो की भी जांच की गई. घटनास्थल पर पूछताछ के दौरान मनिका के पूर्व थानेदार गुलाब रब्बानी ने अपने बयान में बताया था कि घटना के बाद वह बकोरिया पहुंचे थे, तब वहां पहले से पलामू के एएसपी अभियान मौजूद थे.

