लेटेस्ट

Latest

NRC पर गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा - 1987 से पहले जन्‍मे लोगों को माना जाएगा भारतीय नागरिक

Home Ministry official on NRC said - people born before 1987 will be considered Indian citizens

21 December 2019

/ by Uday Bharat

नई दिल्‍ली: केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारी ने स्‍पष्‍ट किया है कि जो लोग 1987 से पहले भारत में जन्‍मे हैं या जिनके माता-पिता 1987 से भारत में पैदा हुए हैं, उन्‍हें प्रमाणिक भारतीय नागरिक माना जाएगा. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसे लोगों को नागरिकता संशोधन कानून 2019 को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है. साथ ही ऐसे लोगों को पूरे देश में लागू होने वाले नेशनल रिजस्‍टर ऑफ सिटिजंस (NRC) को लेकर परेशान होने की भी जरूरत नहीं है.
Jharkhand Chunav Exit Polls: झारखंड में बीजेपी को नुकसान, जेएमएम-कांग्रेस सरकार बनने का अनुमान

माता-पिता में किसी एक का भारतीय होना ही जरूरी होगा

नागरिकता कानून में 2004 में किए गए संशोधनों के मुताबिक, असम को छोड़कर शेष देश में अगर किसी के माता-पिता में कोई भी एक भारत का नागरिक है और अवैध अप्रवासी नहीं है तो ऐसे बच्‍चों को भारतीय नागरिक माना जाएगा. यह स्‍पष्‍टीकरण देश भर में नागरिकता कानून 2019 के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के बीच आया है. अधिकारी ने कहा कि कानून को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें हो रही हैं. इनमें ज्‍यादातर गलत हैं.

कानून के मुताबिक प्राकृतिक तौर पर भारतीय माना जाएगा

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि जो खुद या जिनके माता-पिता 1987 से पहले देश में पैदा हुए हैं उन्‍हें कानून के मुताबिक प्राकृतिक तौर पर भारतीय ही माना जाएगा. वहीं, असम में पहचान और नागरिकता  साबित करने की कट ऑफ डेट 1971 तय की गई है. असम में नागरिकता साबित कर एनआरसी की अंतिम सूची में शामिल होने के लिए दस्‍तावेजों की सूची सुप्रीम कोर्ट ने तय की थी.

कौन एनआरसी-1 में होंगे और कौन होंगे एनआरसी-2 में

गृह मंत्रालय ने स्‍पष्‍ट किया कि अगर आप 26 जनवरी 1950 के बाद और 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में पैदा हुए हैं तो आप एनआरसी-1 में होंगे. वहीं, अगर आप 1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के पहले तक भारत में पैदा हुए हैं तो आप एनआरसी-2 में आएंगे. इसमें माता-पिता में किसी एक का भारतीय साबित होना जरूरी है. अगर 3 दिसंबर 2004 को या इसके बाद आप भारत में पैदा हुए हैं और आपके जन्‍म के समय आपके माता-पिता भारतीय नागरिक हैं या दोनों में कोई एक भारतीय हैं और दूसरे अवैध प्रवासी नहीं हैं तो आप भारतीय नागरिक माने जाएंगे.

3 दिसंबर 2004 के बाद विदेश में पैदा हुए बच्‍चों के माता-पिता को करनी होगी ये घोषणा

अगर आपके पिता जन्‍म से भारतीय नागरिक थे और आपका जन्‍म 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद लेकिन 10 दिसंबर 1992 से पहले विदेश में हुआ है तो आप एनआरसी-1 में होंगे. भारत के बाहर 3 दिसंबर 2004 को या उसके बाद पैदा हुए लोगों को भारतीय नागरिक तभी माना जाएगा जब उनके माता-पिता ये घोषित करें कि उनके पास किसी दूसरे का पासपोर्ट  नहीं है और जन्‍म के सालभर के अंदर उनके जन्‍म का पंजीकरण भारतीय दूतावास (Indian consulate) में काराया गया हो. ऐसे में कहा जा सकता है कि जन्‍म प्रमाणपत्र या म्‍युनिसिपल सर्टिफिकेट नागरिकता साबित करने का अहम दस्‍तावेज होगा.

गृह मंत्रालय (MHA) के प्रवक्‍ता (Spokesperson) ने कहा कि किसी भी भारतीय नागरिक को 1971 से पहले जन्‍म होने की स्थिति में अपने माता-पिता या दादा-दादी के पहचान पत्र, जन्‍म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज के जरिये अपने वंश को साबित करने की जरूरत नहीं होगी.
गृह मंत्रालय ने कहा कि ऐसे अशिक्षित लोग जिनके पास कोई भी दस्‍तावेज नहीं है, उन्‍हें अधिकारी किसी गवाह के जरिये अपनी नागरिकता साबित करने की अनुमति दे सकते हैं. वहीं, वे अपने समुदाय के सदस्‍यों की ओर से जारी दस्‍तावेज के जरिये भी अपनी नागरिकता साबित कर सकते हैं. मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने कहा कि इसके लिए ऐसी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा, जिससे किसी को बेवजह परेशानी नहीं उठानी पड़े.
प्रवक्‍ता ने कहा कि लोग जन्‍मतिथि या जन्‍म स्‍थान से जुड़े दस्‍तावेजों या दोनों दस्‍तावेजों को पेश कर अपनी नागरिकता साबित कर सकते हैं. उन्‍होंने कहा कि ऐसे तमाम दस्‍तावेजों को इसमें शामिल किया जाएगा, जिनमें एक ना एक लोगों के पास होगा ही ताकि किसी भी भारतीय नागरिक का कोई उत्‍पीड़न न कर सके और उन्‍हें बेवजह पेरशानी न होना पड़े.
Don't Miss
© all rights reserved
made with by templateszoo