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झारखंड विधानसभा चुनाव: जानिए, क्या लोकसभा चुनाव के जादू को बरकरार रख पाएगी बीजेपी

Jharkhand Assembly Elections: Know, will BJP be able to keep the magic of Lok Sabha elections

23 December 2019

/ by Uday Bharat

रांची: झारखंड में आज तय होना है कि सीएम रघुवर दास के नेतृत्व में बीजेपी अपनी सत्ता बरकरार रख पाती है या फिर बाजी पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की अगुआई वाले महागठबंधन के हाथ लगती है. 81 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 41 सीटों की दरकार है. सिर्फ 6-7 महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में सूबे में बीजेपी ने 50 प्रतिशत वोट हासिल किए थे और एक सीट को छोड़कर राज्य की सभी सीटों पर कब्जा किया था. अगर इस आंकड़े को देखें तो बीजेपी का रास्ता आसान होना चाहिए लेकिन हकीकत ऐसी नहीं है. राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में वोटिंग का अलग-अलग पैटर्न बीजेपी के खिलाफ जाता है.
पढ़े: मंत्री की धमकी, एयरपोर्ट से नहीं निकल पाएंगे अमित शाह साल 2000 में वजूद में आने के बाद से ही झारखंड राजनीतिक अस्थिरता का दूसरा नाम रहा है. 19 सालों के राज्य के इतिहास में रघुवर दास इकलौते ऐसे सीएम रहे जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किय. इस बार ज्यादातर एग्जिट पोल्स में त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान लगाया गया है. आइए एक नजर डालते हैं पिछले चुनाव में पार्टियों के प्रदर्शन पर.


पिछले चुनाव में पार्टियों का प्रदर्शन

2014 के पिछले झारखंड विधानसभा चुनाव में कुल 81 सीटों में से बीजेपी ने 37 पर जीत ( 31.3 प्रतिशत वोटशेयर) हासिल की थी। AJSU ने 3.7 प्रतिशत वोटशेयर के साथ 5 सीटें जीती थीं. झारखंड मुक्ति मोर्चा का वोटशेयर 20.4 प्रतिशत था और पार्टी की झोली में 19 सीटें आई थीं. बाबू लाल मरांडी के झारखंड विकास मोर्चा (JVM) ने करीब 10 प्रतिशत वोटशेयर के साथ 8 सीटों पर जीत हासिल की थी. हालांकि, बाद में उसके 6 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए. कांग्रेस 10.5 प्रतिशत वोटशेयर के साथ 7 सीटें जीतने में कामयाब हुई थी. 6 सीटें अन्य के खाते में गई थीं.


झारखंड में लोकसभा चुनाव का मोमेंटम बरकरार नहीं रख पाती बीजेपी

रघुवर दास सरकार झारखंड की पहली ऐसी सरकार है जिसने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया है. BJP के सामने सत्ता को बरकरार रखने की चुनौती है. हालांकि, बीजेपी के लिए यह आसान नहीं है. वैसे तो लोकसभा चुनाव में बीजेपी-आजसू गठबंधन ने सूबे की 14 में से 13 सीटों पर परचम लहराया था लेकिन झारखंड में अलग-अलग चुनाव का वोटिंग पैटर्न अलग-अलग है. बीजेपी के लिहाज से बात करें तो झारखंड में पार्टी अबतक कभी भी लोकसभा चुनाव में मिले वोटों को विधानसभा चुनाव तक पूरी तरह सहेज कर नहीं रख पाई है. 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 33 प्रतिशत वोट मिले थे लेकिन उसके बाद 2005 के विधानसभा चुनाव में उसका वोट शेयर गिरकर 23.57 प्रतिशत हो गया। इसी तरह 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 27.53 प्रतिशत वोट मिले थे तो उसी साल विधानसभा चुनाव में महज 20 प्रतिशत वोट मिले. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को झारखंड में 40 प्रतिशत वोट मिले थे लेकिन विधानसभा चुनाव में उसका वोट करीब 9 प्रतिशत घट गया.

महागठबंधन को उम्मीद

पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने झारखंड में 51 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में न दोहरा पाने की बीजेपी की कमजोरी महागठबंधन के लिए उम्मीद की तरह है. महागठबंधन की पूरे दमखम और उत्साह के साथ चुनाव लड़ा. हेमंत सोरेन के साथ उनके पिता शिबू सोरेन ने भी चुनाव प्रचार का मोर्चा संभाला. चुनाव प्रचार के दौरान सोरेन लगातार बीजेपी सरकार पर हमलावर रहे और उसे आदिवासी विरोधी ठहराते रहे. आदिवासी समुदाय में कभी बेहद मजबूत पकड़ रखने वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा को इस बार इस समुदाय से काफी उम्मीदें हैं. सूबे की कुल आबादी में करीब 26 से 27 प्रतिशत आदिवासी हैं. कुल 81 में से 28 सीटें उनके लिए आरक्षित हैं. मुख्यमंत्री रघुवर दास गैर-आदिवासी हैं और जेएमएम चुनाव में इसको अपने पक्ष में भुनाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है.
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