रांची : झारखंड में स्थानीयता को लेकर हमेशा हर सरकार में बहस होती रही है. आदिवासी और मूलवासियों ने हमेशा 1932 के खतियान को स्थानीयता का आधार बनाने की मांग की है. जब से हेमंत सोरेन की अगुवाई में महागठबंधन की सरकार बनी तो मांग ने जोर पकड़ा. कोयलांचल में इसके लिए युवाओं ने आंदोलन शुरू कर दिये. कुछ दिनों पहले उसी इलाके से आने वाले शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने भी कहा था कि 1932 का खतियान लागू होकर रहेगा. आखिर उनकी बात सच निकली. आज राज्य की कैबिनेट ने उसपर मुहर लगा दी है ( master stroke)
क्या है स्थानीयता की नीति
हर राज्य की अपनी स्थानीय नीति होती है, जो नौकरी-रोजगार के लिए आधार मानी जाती है. 2002 में मुख्यमंत्री रहते हुए बाबूलाल मरांडी ने 1932 के खतियान को स्थानीयता का आधार बनाने की कोशिश की तो बहुत विरोध हुआ था. जब अर्जुन मुंडा ने गद्दी संभाली तो उन्होंने तीन सदस्यीय कमेटी इसको लेकर बना दी थी. सुदेश महतो इसके अध्यक्ष थे. लेकिन इसकी रिपोर्ट ठंडे बस्ते में दबकर रह गई. इसके बहुत बाद 2014 में रघुवर दस के दौर में स्थानीय नीति को परिभाषित किया गया. इसमें 1985 से झारखंड में रहने वालाें को स्थानीय माना गया.
क्या है 32 का खतियान
झारखंड के वे निवासी जिनके पुरखों का नाम 1932 के खतियान में हो वो ही स्थानीय कहलाएंगे. हालांकि इसमें भी कई पेंच हैं, इसे सरकार आने वाले समय में स्पष्ट कर सकेगी.
इसके लागू होने से क्या पड़ेगा असर
झारखंड में बरसों से रह रहे वे लोग जिनके नाम 32 के खतियान में नाम नहीं है, वे कई तरह की सरकारी सुविधाओं से वंचित हो जाएंगे. स्थानीय के लिए आरक्षित नाैकरी या शैक्षणिक पाठ्यक्रमाें में नाैकरी के लिए आवेदन नहीं दे पाएंगे. स्थानीय के लिए शुरू हाेने वाली याेजनाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे. बता दें आजादी के बाद जब विकास की मिनारे खड़ी की जाने लगीं तो झारखंड में भी कल-कारखाने लगे. इसमें काम करने के लिए बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से लोग आए. घर-द्वार बनाकर वो यहीं बस गए. उनके बच्चों ने यहीं से पढ़ाई-लिखाई की. 32 खतियान के लागू होने से उनपर बड़ा प्रभाव पड़ेगा. झामुमो को इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है, इससे उसे आदिवासी और मूलवासियों के वोट मिल सकते हैं. लेकिन दूसरीे ओर भाजपा और कांग्रेस के लिए इसका उलटा असर हो सकता है, क्योंकि उनके वोट बैंक में बाहर के सामान्य वर्ग के लोगों का प्रतिशत अधिक है.
इसके साथ ही ओबीसी आरक्षण को भी बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया गया है. राज्य में आरक्षण का दायरा बढ़ाया गया है. अब झारखंड में कुल 77 प्रतिशत होगा. अनुसूचित जाति को 12%, ST को 28%, ओबीसी 1 को 15% ओबीसी 2 को 12% आरक्षण की मंजूरी. इस बाबत भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा.


No comments
New comments are not allowed.