DESK : कोरोना वायरस ने इंसानों का कत्लेआम कर पूरी दुनिया में कोहराम मचा है। दुनिया के करीब 170 देश इसके दर्द से कराह रहे हैं। हर जगह इंसानियत पनाह मांग रही है। कोरोना से बचने के उपाय भी बताए जा रहे हैं। उसमें से मास्क को पहनना जरूरी बताया जा रहा है ताकि व्यक्ति इंफेक्शन से बच सके। WHO के द्वारा भी मास्क को पहनना अनिवार्य बताया गया है। भला जान किसे प्यारा नहीं, 1 अरब 37 करोड़ आबादी वाले देश मे जब मास्क आवश्यक आवश्यकता बन जाये तो आप समझ सकते हैं कि उसकी खपत कितना बढ़ जाएगा।
एक दिन में एक हजार बिकने वाला मास्क प्रतिदिन चार करोड़ बिकने लगा
कोरोना के कहर के बाद मास्क को आवश्यक आवश्यकताओं में गिना जाने लगा है ।चलते - फिरते लोगों नाक पर लगा मास्क आज की तारीख में जान बचाने का सबसे कारगर उपाय है। कोरोना के संक्रमण के खिलाफ कारगर हथियार साबित हो रहे मास्क की कीमतों में भी भारी उछाल आया है।हालांकि बाजार में कई तरह के मास्क उपलब्ध हैं। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा एन -95 मास्क को ही बेहतर माना गया है इसके बाद 3 प्लाई मास्क आता है। गौरतलब है कि दोनों मास्क डिस्पोजेबल है। दुनिया मे कोरोना के संकट गहराने के बाद ऑल इंडिया फूड एंड ड्रग लाइसेंस होल्डर फाउंडेशन के नेशनल प्रेसिडेंट अभय पांडे ने 31 जनवरी 2020 को ही भारत सरकार को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें कहा गया था कि एन-95 मास्क को विदेश जाने से रोकें। पूरी दुनिया में कोरोना के प्रभाव को देखते हुए सरकार ने तुरंत एन-95 मास्क का एक्सपोर्ट रोक दिया। लेकिन वह रोक भी देश के खपत की भरपाई नहीं कर पा रहा ।अभय पांडे की मानें तो एन- 95 मास्क की खपत 29 हजार गुना बढ़ गई है। जबकि पहले यह सिर्फ 1 हजार 670 मास्क प्रतिदिन औसतन बिकता था। अब रोज 4 करोड एन-95 दिख रहा है इसके बावजूद देश में इसकी कमी बनी हुई है।
1600 करोड़ का कारोबार प्रतिदिन
मास्क के बिजनेस ने अर्थशास्त्रीय सिद्धान्त को ही बदल डाला। अर्थशास्त्र के सिद्धांत के मुताबिक कहा गया है कि " हाइअर द डिमांड लोअर द प्राइज,लोअर द डिमांड हाइअर द प्राइज" लेकिन यहां डिमांड बढ़ने के साथ साथ दाम में भी बेतहासा वृद्धि हुई। जानकार बताते हैं की एन-95 का कारोबार प्रतिदिन 16 सौ करोड रुपए तक पहुंच चुका है। वहीं दूसरी तरफ थ्री प्लाई मास्क का प्रोडक्शन भी प्रतिदिन 3 करोड़ हो रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि 2019 में 5 लाख भी एन 95 मांस की खपत नहीं हुई थी। जिस डिमांड 29 हजार गुना बढ़ गई है। देश की तीन कंपनियों के द्वारा एन 95 मास्क का प्रोडक्शन किया जाता है ।इसमें विनस, मैगल्म और त्रियम है। बढ़ते डिमांड को देखते हुए आधा दर्जन छोटी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने भी एन-95 मास्क बनाना शुरू कर दिया।
छह घण्टे से ज्यादा नहीं कर सकते मास्क का उपयोग
विशेषज्ञ मानते हैं कि आप एन 95 मास्क को भी 6 घंटे से ज्यादा उपयोग में नहीं ला सकते। इतना ही नहीं मेडिकल स्टाफ को तो दिन में चार-चार मास्क चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के गाइडलाइन के मुताबिक अगर आप इसे समय रहते चेंज नहीं करेंगे तो इसमें वायरस पनपने की आशंका ज्यादा हो जाती है। कुल मिलाकर कोरोना के संकट ने मास्क के बाजार को इतना बड़ा कर दिया है कि खुद मास्क वाला बनाने वाली कंपनियां भी सपने में नहीं सोचा होंगी।

