इस दौरान उन्होंने कहा कि एनआईए एक जिम्मेदार और स्वच्छ संस्था है. लेकिन संस्था व्यवसायी के द्वारा दिए गए एक्सट्रोशन को फंडिंग ना समझे. व्यवसायी काम करने के साथ-साथ अपनी जानमाल की रक्षा के लिए लेवी मजबूरी में देते हैं. ये जबरन वसूली है. मेरे क्लाईंट संजय जैन ने कभी टेरर फंडिंग नही किए हैं.
प्रवीण गुप्ता ने कहा कि कोयला व्यापारी अपनी जान जोखिम में डालकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करने जाते है. वे वहां के लोगों को रोजगार मुहैआ कराते है. उन्हें नक्सलियों द्वारा जान से मारने की धमकी मिलती है. अपनी और अपने कर्मचारियों की जान की हिफाजत के लिए ये लोग मजबूरी में लेवी देते है. जिसे टेरर फंडिग का नाम दिया जा रहा है.
बता दें आधुनिक कंपनी के जीएम संजय जैन पिछले डेढ़ साल से जेल में बंद है. एनआईए ने टेरर फंडिग के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया था.

