पलामू: हुसैनाबाद अनुमंडल स्थित एक डाकघर में बचत अभिकर्ता द्वारा सैकड़ों खाताधारियों के लगभग 50 लाख रुपये डकार लिये जाने का मामला प्रकाश में आया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के देवरी खुर्द गांव निवासी और डाकघर की स्टैंडराइज्ड एजेंसी सिस्टम (एसएएस) के अभिकर्ता कृष्णा विश्वकर्मा उर्फ कृष्णा शर्मा और उसकी पत्नी महिला प्रधान क्षेत्रीय बचत योजना एजेंट कुन्ती देवी ने खाताधारियों को विश्वास में लेकर उनके लगभग 50 लाख रुपये डकार लिये.
उल्लेखनीय है कि आवर्ती जमा योजना (आरडी) का सारा पासबुक वह स्वयं रखता था. आज भी पलामू जिले के 95 प्रतिशत आरडी खाताधारियों का पासबुक बचत अभिकर्ता के पास ही है, जो माह की अंतिम तिथि को चालान बनाकर एक साथ रुपये जमा करते हैं.
सूत्रों के अनुसार कुन्ती के पति और देवर पहले बढ़ई मिस्त्री का पुश्तैनी कार्य करते थे. बाद में स्थानीय लोगों को विश्वास में लेकर कृष्णा शर्मा जो स्वयं भी डाकघर का अभिकर्ता है और इसका भाई, दोनों ने कुन्ती देवी के नाम पर आवर्ती जमा योजना के तहत एक सौ रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक का आरडी खाता खोलना शुरू किया. प्रारम्भ में कृष्णा विश्वकर्मा देवरी खुर्द एवं देवरी कला पंचायत के ग्रामीणों का डाकघर से सम्बंधित सारा कार्य अपने माध्यम से निष्पादित करने लगा. इस प्रकार वह लोगों का विश्वास जीतने में सफल हो गया.
स्थानीय ग्रामीणों में जब कृष्णा शर्मा की साख मजबूत हो गयी तो इसकी गिद्ध दृष्टि खाताधारियों के जमा पैसे पर लग गयी. प्रारम्भ में जब खाताधारियों का आवर्ती जमा योजना की परिपक्वता अवधि पूर्ण हुई तो प्रधान डाकघर से कलेक्शन के नाम पर ग्राहकों का पैसा छह माह या सालभर बाद देता था, लेकिन लोगों को शक नहीं हुआ.
खाताधारियों के जमा पैसे से ही वह अपने घर का सारा खर्च चलाता था. इधर, अचानक छठ पर्व के समय कृष्णा क्षेत्र से गायब हो गया. लोग अपने किश्त की राशि जमा करने हेतु उसे ढूंढने लगे तो घरवालों ने बताया कि वह अपना मोबाइल बंद कर लापता हो गये हैं.
आश्चर्य
की बात तो यह है कि जब कई लोगों ने खाता नंबर से स्टेटस चेक करवाया तो पता
चला कि जो खाताधारी एक सौ रुपये प्रतिदिन देता था उसका मात्र एक हजार
रुपये महीने का आरडी खाता खोला गया है, जबकि तीन हजार महीना होना चाहिये. इसी
प्रकार कई खाताधारियों का आरडी तीन साल पूरा होने पर जाली हस्ताक्षर कर
रुपये की निकासी कर लिया. कई लोगों का तो खाता ही नहीं खोला गया और
प्रतिमाह निर्धारित रकम की वसूली की जाती थी.

